Thursday, December 19, 2019

राजा और उसके पकवान !

             राजा और उसके पकवान !
एक दिन एक राजा ने अपने रसोइये को बुलाया और उससे कहा, "मैं
चाहता हूँ कि आज तुम मेरे लिए सबसे अधिक स्वादिष्ट मीठी चीज
बनाओ।" रसोइये ने सिर हिलाया और रसोईघर में चला गया।
अब, हो सकता है कि यह कोई अनुचित माँग न लगे पर यही हर दिन
होता था। हर रात को राजा सबसे स्वादिष्ट मीठी चीज़ खाना चाहता था।
इस रूटीन से रसोइया परेशान रहने लगा। हर रात राजा भोजन करता था
और चाहे कितनी भी मेहनत करके रसोइया कोई मीठी चीज बनाए, पर
राजा कभी संतुष्ट नहीं होता था "सबसे स्वादिष्ट मीठी चीज", यही
रसोइये को हर दिन, हर रात सुनना पड़ता था।
एक दिन रसोइया कुछ ऐसा करने वाला था, जिसे राजा हमेशा याद रखें
और सचमुच कुछ ऐसा ही हुआ, जो राजा को याद रखना पड़ा! रात को
भोजन के बाद सबसे अधिक स्वादिष्ट मीठी चीज़ राजा के सामने पेश का
गई। उसकी मीठी सुगंध महल में फैल गई। दरअसल पूरा इलाका
मीठी चीज़ की भूखवर्द्धक महक से भर गया।
जिस किसी को भी यह महक लगी, उसके मुँह में पानी आने लगा। आज
तो रसोइये ने अपनी सारी हदें पार कर दी थी।
जैसे ही राजा मीठी चीज़ खाने लगा, उसने देखा कि उसकी खुशबू से
खिंचकर महल के चारों ओर से सारे चूहे भोजन के कमरे में ही आ गए।
सब जगह चूहे ही चूहे ! भोजन करने का टेबल भी चूहों से ही भर गया। वे
पर्दो पर चढ़ गए और यहाँ तक कि राजा की दाढ़ी भी चूहों से नहीं बची,
क्योंकि मीठी चीज़ का बचा हुआ छोटा-सा टुकड़ा भी चूहे उसकी दाढ़ी
में ढूँढ़ रहे थे।
यह तो राजसी आपदा थी। हर जगह चूहे थे, कालीन पर, पेंटिंग्स पर, पर्दो
पर और अभी भी और आ ही रहे थे।
एक आपातकालीन मीटिंग बुलाई गई, यह तय करने के लिए कि इस
समस्या का निदान कैसे किया जाए।
अपना गला साफ करते हुए राजा ने कहा : "अब हम क्या करें? हम पर
चूहा न आक्रमण कर दिया है। अगर किसी के पास कोई सुझाव हो तो
बताएं।"
मंत्रियों ने आपस में बातचीत की और कहा : "महाराज ! हम इस निष्कर्ष
पर पहुंचे हैं कि चूहों को भगाने के लिए बिल्लियों को बुला लेना चाहिए।"
यह बात राजा को जच गई।
सेनापति को बुलाया गया और आदेश दिया गया कि राज्य में जितनी भी
बिल्लियाँ हैं, उन सबको इकट्ठा करके तुरंत महल में लाया जाए।
जल्दी ही बिल्लियाँ आने लगी और बेशक चूहों से छुट्टी मिल गई, पर
महल बिल्लियों से भर गया।
अब सब जगह बिल्लियाँ ही बिल्लियाँ थीं। सभी चीजें नोच रही थीं,
फर्नीचरों और पर्दो पर चढ़कर पंजे मार रही थीं। हर समय लगातार
म्याऊँ म्याऊँ से सबके कान बहरे होने लगे।
अब दूसरी मीटिंग बुलाने का समय था।
राजा ने कहा : "हां! तो कोई और सुझाव?"
पहले की तरह मंत्री ने जोर जोर से बहस करने लगे। थोड़ी देर बाद
उन्होंने कहा : "महाराज ! हमारा यह सुझाव है कि कुत्तों को बुलाया जाए,
क्योंकि बिल्लियां कुत्तों को पसंद नहीं करती हैं।"
सेनापति को बुलाया गया और आदेश दिया गया कि राज्य में जितने भी
कुत्ता है, उन सबको पकड़कर जितनी जल्दी
जल्दी ही बिल्लियों की जगह कुत्तों ने ले ली। अब हर जगह और कुछ
नहीं, बस कुत्ते भौंक रहे थे और जहाँ-तहाँ अपना काम कर रहे थे।
अब तीसरी मीटिंग का समय आ गया और इस बार यह तय किया गया
कि कुत्ते शेर से डरते हैं, इसलिए राज्य के सभी शेर इकट्ठे किए जाएँ और
महल में लाए जाएँ।
जल्दी ही कुत्ते गायब होने लगे और महल शेरों से भरने लगा।
इससे बहुत ही गंभीर समस्या पैदा हो गई !
शेर सिर्फ खुँखार ही नहीं थे, बल्कि वे कहीं हमला न कर दें, इस डर के ।
मारे किसी की हिलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी।
बड़ी ही मुश्किल से अगली मीटिंग बुलाई गई और यह तय किया गया कि
तुरंत हाथियों को महल में बुलाया जाए, क्योंकि शेर हाथियों से डरते हैं।
जैसे ही हाथी महल में आने लगे, सारे शेर महल को पहले से भी और
अधिक गंदा करके भागने लगे। अब सारा महल हाथियों से भर गया और
महल में चलने की जगह भी नहीं रही।
हाथी सारी चीजें तोड़ने लगे और तबाही बर्दाश्त से बाहर हो गई।
जल्दी ही सारा महल हाथी की लीद से भरने लगा।
दुर्गंध इतनी बढ़ गयी कि उसका वर्णन करना मुश्किल था।
फिर से मीटिंग बुलाने का समय आ गया और इस बार यह तय किया गया
कि चूहों को बुलाया जाए, क्योंकि हाथी चूहों से डरते हैं।
सेनापति ने वैसा ही किया और जैसे ही चूहे आने लगे, सारे हाथी चले
गए, लेकिन महल में सभी लोगों ने महसूस किया कि वे वापस वहीं आ
गए, जहाँ से उन्होंने शुरुआत की थी।
अब राजा ने यह महसूस किया कि इन सबके लिए वही जिम्मेदार था,
क्योंकि अगर वह इतना लालच नहीं करता तो ऐसा नहीं होता।
जब कोई समस्या आती है, लोग तुरंत उसका निवारण ढूँढने लगते हैं, परहम
अक्सर उन समस्याओं के मूलभूत निवारण के बारे में नहीं सोच पाते हैं, जो
हमारे सामने हैं। जब हम समस्या के सही रूप को नहीं समझ पाते हैं तो
अलपकालीन निवारण से हम अक्सर और भी बड़ी समस्या पैदा कर देते हैं।
इसका नतीजा होता है रामय और बहुमूल्य संसाधनों की बेटी।
जয सोचिए! विचारिए! आपके जीवन में आपके सामने जो समस्याएं हैं,
उनका मूल कारण क्या है?

Written by:- International Speaker Mr. PREM RAWAT (AMBASSADOR OF PEACE)

IF U LIKE THAN SHARE IT ALSO COMMENT.
FOLLOW UP FOR MORE TYPE OF STORY AND INSPIRATIONAL VIDEOS.
Facebook Page :-👉🏼 www.facebook.com/khudkisahipahchan.
Youtube (Subscribe):-👉🏼 https://www.youtube.com/channel/UC002XpAGzID_0NuVsgniTQQ.
Instagram :-👉🏼 www.instagram.com/ khud_ki_sahi_pahchan.
Blog : -👉🏼 https://khudkisahipahchan.blogspot.com/
Gmail :-👉🏼 khudkisahipahchan@gmail.com
Thank you

Wednesday, December 18, 2019

The two ants

The two ants

One day two ants happened to cross paths.
One ant lived on a sugar hill and one on a salt hill.

I haven't seen you around here before, where are you from?"
said the salt ant.

I live on the sugar hill, replied the sugar ant.
'Sugar hill What's sugar? inquired the salt ant.
"Sugar is delicious and sweet. Just thinking about it makes my

mouth water. Are you sure you've never eaten sugar before
All we have around here is salt. You can eat it, but it makes

you very thirsty. I like the sound of this sugar you speak of.
Well then, come and visit my sugar hill and see for yourself

how good it tastes.

The two ants set a date and decided to meet at the sugar hill.

The sugar ant gave directions how to get there.
As the day of the visit approached, the salt ant started to think

les the sugar. I would have travelled such a

long way and I will be hungry. Just in case, I'll take some salt
with me in my mouth.

At the sugar hill, the sugar ant was waiting to greet the salt
ant.

Welcome to my sugar hill. Here, try some sugar and see how
good it tastes.

The salt ant put some sugar into his mouth. Hmmm, this
tastes just like my salt,' he said.
Puzzled by this response, the sugar ant said, Are you sure?
Sugar and salt taste very different. Try some more.

The salt ant put some more sugar in his mouth and after a
moment said,

Yep, this is the same taste as my salt. Around here you call it
sugar, but where I live we call it salt. It's the same thing.

The sugar ant knew that salt and sugar taste different, so he
knew something was wrong. He thought for a while and then
said, 'Open your mouth so I can see what's in there.

When the salt ant opened his mouth, sure enough there was a

big lump of salt.
There is the problem. Take out that salt and then taste the

sugar again, said the sugar ant.
The salt ant took out the lump of salt and taste the sugar.
He finally got to taste the sweetness. Wow, this is incredible!
So sweet. I'm never gei
i to my salt hill,' he said.

In life we have to leave one step behind in order to take the
next Success is built on our ability to evolve, to learn and to
grow. To evolve, we must take along what's good and leave
behind what isn't needed.

The more we can do this, the more successful we will be.
This story also shows how at times, we are our own worst
enemy. We have a tendency to not accept things as they are
and to see everything through our own filters.

Some people ask me, "Do i even have a choice? Isn't all this
determined by the movements of the stars?" As if the cards
have already been dealt and you are not the one making the
decisions

The answer give is, 'No, it's not the stars. Our own contu
sion is what leads to bad choices, and that is what creates
most of our problems. When we can let go of our ideas
about how things should be, we can start to see things as
they are. Then we have the full range of choice.

FOR MORE PLEASE SUBSCRIBE OUR YOUTUBE CHANNEL. "KHUD KI SAHI PAHCHAN"
(

Thursday, December 12, 2019

कुत्ता और शेर एक खुबसूरत समझ की कहानी

कुत्ता और शेर

एक छोटा-सा कुत्ता था। वह एक दिन टहलते-टहलते घने जंगल में चला गया। जब जंगल
में चला गया तो उसको लगा कि बाप रे बाप! मैं इतने गहरे जंगल में आ गया हूं। उसको
खतरा लगा! उसने इधर-उधर सूंघा। कुत्ता तो है ही! सूंघा तो उसको ऐसी गंध आई कि
जैसे पहले कभी आयी नहीं थी। तो उसको लगा कि कोई शेर है, जो मुझे खायेगा। वह
आगे चलता गया, चलता गया, चलता गया तो उसको एक हड्डियों का बहुत बड़ा ढेर
मिला! तो वहां जाकर बैठ गया। अब सोचने लगा, "बचना है तो सोच ले!" इतने में पीछे
से गुजरता हुआ एक शेर आया।


तो कुत्ता बोलता है, "वाह, वाह! इतने शहरों को खा गया, अभी भी मेरी भूख खत्म नहीं हुई।
एक और शेर मिल जाए तो हो सकता है. मेरी भख खत्म हो जाए।"

जैसे ही शेर ने यह सुना कि एक छोटा-सा कुत्ता और उसके सामने हड्डियों का ढेर है ! तो
उसको भी लगा कि "हो सकता है, यह मुझे खा जाये"।

तो शेर बेचारा मुडा और दूध दबाए हुए वहां से वापस चल दिया। एक बंदर पेड पर बैठा हआ
यह सब देख रहा था। बंदर नीचे आया और शेर के पास गया। शेर को उसने बताया कि "यह
छोटा कुत्ता हमको बेवकूफ बना रहा है। यह सिर्फ तुमको सुनाने के लिए कह रहा था, ताकि
तुम डर जाओ। इसने किसी शेर को नहीं खाया है।"

यह सुनकर शेर को बड़ा गुस्सा आया कि यह कुत्ता मुझे बेवकूफ बना रहा है।

बंदर ने शेर को कहा कि "उसको खाने के लिए वापस चलो!"

शेर ने कहा, "तू मेरी पीठ पर बैठ। हम दोनों चलते हैं।" ।
बंदर शेर की पीठ पर बैठ गया और दोनों चलने लगे। कुत्ता वहीं का वहीं था। उन दोनों को
आते हुए देखकर मन ही मन सोचा, "फिर सोच ले! अब की बार तू गया ! इस बार तो बंदर
अभी आ रहा है। उसी ने कहीं गड़बड़ी की होगी। सोच ले!"

शेर
बहुत ही नजदीक आ गया तो कुत्ता सुनाते हुए कहता है, "कहां गया वह कम्बख्त बंदर ?
उसको आधे घंटे पहले मैंने शेर लाने के लिए भेजा था, अभी तक नहीं आया?" तो शेर ने
जैसे ही यह बात सुनी, उसने बंदर को उठाया, पीटा और भाग गया। इस तरह चतुराई से उस
दिन कुत्ते ने अपनी जान बचा ली।

आप भी सोच लीजिए! क्योंकि वह तो शेर था। आपके आसपास तो काल मंडरा रहा है। वह
इंतजार कर रहा है, "कब मौका मिले?" आपको परवाह ही नहीं है, क्योंकि मनुष्य घमण्ड
के नशे में चूर है। मनुष्य को घमण्ड हो जाता है "मैंने यह कर लिया, मैं यह हूं! मेरा यह है,
मेरा वह है!" अगर आपको अपने जीवन में चतुराई करनी ही है तो ऐसी चतुराई कीजिए कि
आप अपने जीवन में अशुभ से बचे और सबसे बड़ा अशुभ है अज्ञानता। अगर अज्ञानी हैं तो
अशुभ है। अगर आपको ज्ञान है तो सब शुभ है। जो चीज मूल्यवान है, वह सुरक्षित है। उसे
महसूस कीजिए।

आपका जन्म क्यों हुआ? आपका जन्म हुआ है, ताकि आप उस चीज को पहचानें, उसको
जानें और अपने जीवन को सफल बनाएं। आपके घट में अलख पुरुष अविनाशी है! आप
उसको जानते नहीं हैं। अगर आप उसको जान जाएंगे, तभी आपके जीवन के अंदर शांति
आयेगी। उससे पहले नहीं आ सकती।

निचे लिंक को किल्कि करे ओर देखे एक और कहानी...
https://youtu.be/oth78odPb0k
या
Youtube channel "khud ki sahi pahchan" मै जाके देखे और भी कहानिया.

Tuesday, November 26, 2019

आज के अभिभावको के लिए जरूरी सिख

आज के अभिभावको के लिए जरूरी सिख

*...."बाज़" ऐसा पक्षी, जिसे हम ईगल भी कहते है'* जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है। *पक्षियों की दुनिया में ऐसी Tough and tight training किसी भी ओर की नही होती।*
मादा *बाज अपने चूजे को लेकर लगभग 12 Km*  ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर आधुनिक जहाज उड़ा करते हैं और *वह दूरी तय करने में मादा बाज 7 से 9 मिनट का समय लेती है।*

*....यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा। उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है? तेरी दुनिया क्या है? तेरी ऊंचाई क्या है?* तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और *फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है।*
धरती की ओर *ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 2 Kmt. उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है*। 7 Kmt. के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते है।
*लगभग 9 Kmt. आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है। यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है।*
अब धरती से *वह लगभग 3000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है*। अब धरती के बिल्कुल करीब आता है जहां से वह देख सकता है उसके *स्वामित्व* को। अब उसकी दूरी धरती से *महज 700/800 मीटर* होती है लेकिन उसका पंख अभी इतना *मजबूत* नहीं हुआ है की वो उड़ सके।
धरती से लगभग 400/500 मीटर दूरी पर उसे अब लगता है कि उसके जीवन की शायद अंतिम यात्रा है। *फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपनी गिरफ्त मे लेता है* और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है।
*यह पंजा उसकी मां का होता है* जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही होती है। और *उसकी यह ट्रेनिंग निरंतर चलती रहती है जब तक कि वह उड़ना नहीं सीख जाता।*

यह *ट्रेनिंग एक कमांडो की तरह होती है। तब जाकर दुनिया को एक बाज़ मिलता है* अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का भी शिकार करता है।
हिंदी में एक कहावत है... *"बाज़ के बच्चे मुँडेर पर नही उड़ते।"*
बेशक अपने बच्चों को अपने से चिपका कर रखिए पर *उसे दुनियां की मुश्किलों से रूबरू कराइए, उन्हें लड़ना सिखाइए। बिना आवश्यकता के भी संघर्ष करना सिखाइए।*

*वर्तमान समय की अनन्त सुख सुविधाओं की आदत व अभिवावकों के बेहिसाब लाड़ प्यार ने मिलकर, आपके बच्चों को "ब्रायलर मुर्गे" जैसा बना दिया है* जिसके पास मजबूत टंगड़ी तो है पर चल नही सकता। वजनदार पंख तो है पर उड़ नही सकता क्योंकि *"गमले के पौधे और जंगल के पौधे में बहुत फ़र्क होता है।"*

शान्ति संदेश

सब कहीं न कहीं, अपने-अपने मामलों में व्यस्त हैं। कोई
कहीं जाता है, कोई कहीं जाता है। मनुष्य की कैसी जरुरत
है, जिसको वह पूरा करना चाहता है? मनुष्य की कुछ ऐसी
जरूरतें होती हैं, जिनको अगर मनुष्य रोकना भी चाहे तो
उसे रोक नहीं सकता है। शांति की जरूरत भी ऐसी ही
 जरूरत है। वह अंदर की जो पुकार है, वह भी किसी का
 लिहाज नहीं करती है। दुनिया वाले कहते हैं, "इधर देखो!
संसार की तरफ देखो! तुमको बड़ा आदमी बनना है"
परंतु सिर्फ संत-महात्मा ही सुनाते हैं कि 
" घट में है सूझे
नहीं!" जिस चीज की आपको जरूरत है, वह तो आपके
अंदर बैठा हुआ है। जिससे आप असली नाम जोड़ना चाहते
हैं, वह आपके अंदर बैठा हुआ है। परंतु मनुष्य कहां खोजता
है? बाहर भेजता है। मैं चाहता हूं कि अब समय आ गया

है, अपने अंदर के भगवान का अनुभव करने का, जिसका
न चेहरा है, न दांत हैं, न आँखें हैं, न मुंह है, न कान हैं।

वह निरंतर आपके अंदर विराजमान है । उसका आप अनुभव
कर सकते हैं। हम मानने की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि
जानने की बात कर रहे हैं। आप जानना चाहते हैं तो सारी
दुनिया में देखिए। जहां मिले, वहीं ठीक है। अगर कहीं न
मिले तो हम हैं।
(प्रेम रावत शान्ति वक्ता)

Monday, April 8, 2019

अर्जुन को अहंकार हो गया

एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनकी इस भावना को श्रीकृष्ण ने समझ लिया। एक दिन वह अर्जुन को अपने साथ घुमाने ले गए। रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उसका व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास खा रहा था और उसकी कमर से तलवार लटक रही थी। अर्जुन ने उससे पूछा, ‘आप तो अहिंसा के पुजारी हैं। जीव हिंसा के भय से सूखी घास खाकर अपना गुजारा करते हैं। लेकिन फिर हिंसा का यह उपकरण तलवार क्यों आपके साथ है?’ ब्राह्मण ने जवाब दिया, ‘मैं कुछ लोगों को दंडित करना चाहता हूं।’

‘ आपके शत्रु कौन हैं?’ अर्जुन ने जिज्ञासा जाहिर की। ब्राह्मण ने कहा, ‘मैं चार लोगों को खोज रहा हूं, ताकि उनसे अपना हिसाब चुकता कर सकूं। सबसे पहले तो मुझे नारद की तलाश है। नारद मेरे प्रभु को आराम नहीं करने देते, सदा भजन-कीर्तन कर उन्हें जागृत रखते हैं। फिर मैं द्रौपदी पर भी बहुत क्रोधित हूं। उसने मेरे प्रभु को ठीक उसी समय पुकारा, जब वह भोजन करने बैठे थे। उन्हें तत्काल खाना छोड़ पांडवों को दुर्वासा ऋषि के शाप से बचाने जाना पड़ा। उसकी धृष्टता तो देखिए। उसने मेरे भगवान को जूठा खाना खिलाया।’

‘आपका तीसरा शत्रु कौन है?’ अर्जुन ने पूछा।

‘ वह है हृदयहीन प्रह्लाद। उस निर्दयी ने मेरे प्रभु को गरम तेल के कड़ाह में प्रविष्ट कराया, हाथी के पैरों तले कुचलवाया और अंत में खंभे से प्रकट होने के लिए विवश किया। और चौथा शत्रु है अर्जुन। उसकी दुष्टता देखिए। उसने मेरे भगवान को अपना सारथी बना डाला। उसे भगवान की असुविधा का तनिक भी ध्यान नहीं रहा। कितना कष्ट हुआ होगा मेरे प्रभु को।’ यह कहते ही ब्राह्मण की आंखों में आंसू आ गए। यह देख अर्जुन का घमंड चूर-चूर हो गया। उसने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगते हुए कहा, ‘मान गया प्रभु, इस संसार में न जाने आपके कितने तरह के भक्त हैं। मैं तो कुछ भी नहीं हूं�

Thursday, March 28, 2019

जीवन में कामयाबी

जीवन में कामयाबी

हम इस जीवन के अंदर बहुत-कुछ सुनते हैं। सवेरे से लेकर शाम तक कोई न कोई, कुछ न कुछ सुनाता ही रहता हैं। परंतु हमें चाहिए कि अपने जीवन में कुछ समय निकाल कर ऐसी बातें सुनें जिससे सचमुच में हमारा भला हो।
      मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि सारे संसार को गन्ना, हिन्दुस्तान की देन हैं। गन्ना हिन्दुस्तान से ही शुरू होकर, सारे संसार मैं फैला हैं। गन्ना हैं क्या ? आप लोगों ने गन्ना उगते हुए देखा होगा? पहले खेत जोतते हैं और फिर उसमें गन्ना को फेंकते हैं, फिर पिछे से कोई आता है और जहां गन्ने का अंकुर निकलेगा, उसको सीधा करता है। फिर उसे मिट्टी से ढक देते हैं, फिर उसमें पानी डाला जाता हैं। मिट्टी में कोई मिठास नहीं होती है, उस पानी में भी कोई मिठास नहीं होती हैं, परंतु जब गन्ना तैयार हो जाता है तो उसमें बहुत मिठास होती हैं! गन्ने ने अपने छोटे-से जीवन में एक काम कर लिया। उसका जीवन ज्यादा बड़ा तो होता नहीं हैं, पर जबतक वह बड़ा हो जाता हैं, तबतक वह एक काम कर लेता है कि अपने अंदर मिठास भर लेता है।

                                 

तो प्रश्न उठता हैं कि हम अपने जीवन में क्या भरते हैं ?

Wednesday, March 27, 2019

Management funda

🤵🏻 *मैनेजमेंट लेसन:*

एक दिन एक कुत्ता 🐕 जंगल में रास्ता खो गया..

तभी उसने देखा, एक शेर 🦁 उसकी तरफ आ रहा है..

कुत्ते की सांस रूक गयी..
"आज तो काम तमाम मेरा..!"

He thought, & applied A lesson of
MBA..

फिर उसने सामने कुछ सूखी हड्डियाँ ☠ पड़ी देखी..

वो आते हुए शेर की तरफ पीठ कर के बैठ गया..

और एक सूखी हड्डी को चूसने लगा,
और जोर जोर से बोलने लगा..

 "वाह ! शेर को खाने का मज़ा ही कुछ और है..
एक और मिल जाए तो पूरी दावत हो जायेगी !"

और उसने जोर से डकार मारी..
इस बार शेर सोच में पड़ गया..

उसने सोचा-
"ये कुत्ता तो शेर का शिकार करता है ! जान बचा कर भागने मे ही भलाइ है !"

और शेर वहां से जान बचा के भाग गया..

पेड़ पर बैठा एक बन्दर 🐒 यह सब तमाशा देख रहा था..

उसने सोचा यह अच्छा मौका है,
शेर को सारी कहानी बता देता हूँ ..

शेर से दोस्ती भी हो जायेगी,
और उससे ज़िन्दगी भर के लिए जान का खतरा भी दूर हो जायेगा..

वो फटाफट शेर के पीछे भागा..

कुत्ते ने बन्दर को जाते हुए देख लिया और समझ गया की कोई लोचा है..

उधर बन्दर ने शेर को सारी कहानी बता दी, की कैसे कुत्ते ने उसे बेवकूफ बनाया है..

शेर जोर से दहाडा -
"चल मेरे साथ, अभी उसकी लीला ख़तम करता हूँ"..

और बन्दर को अपनी पीठ पर बैठा कर शेर कुत्ते की तरफ चल दिया..

Can you imagine the quick "management" by the DOG...???

कुत्ते ने शेर को आते देखा तो एक बार फिर उसके आगे जान का संकट आ गया,

मगर फिर हिम्मत कर कुत्ता उसकी तरफ पीठ करके बैठ गया l

He applied Another lesson of MBA ..

और जोर जोर से बोलने लगा..

"इस बन्दर को भेजे 1 घंटा हो गया..
साला एक शेर को फंसा कर नहीं ला सकता !"

यह सुनते ही शेर ने बंदर को वही पटका और वापस पिछे भाग गया ।

*शिक्षा 1:- मुश्किल समय में अपना आत्मविश्वास कभी नहीं खोएं*

*शिक्षा 2:- हार्ड वर्क के बजाय स्मार्ट वर्क ही करें क्योंकि यहीं जीवन की असली सफलता मिलेगी*

*शिक्षा 3 :- आपका ऊर्जा, समय और ध्यान भटकाने वाले कई बन्दर आपके आस पास    हैं, उन्हें पहचानिए और उनसे सावधान रहिये*

😃 *व्यस्त रहिये, स्वस्थ रहिये

Page ko like kare share kare or comment krna na bhule.
👌Link ko click kare or ek Prernadayak video dekhe.
https://youtu.be/XAG92z_7jO0

Tuesday, March 26, 2019

कामयाबी

एक बार बादलों की हड़ताल हो गई बादलों ने कहा अगले दस साल पानी नहीं बरसायेंगे। ये बात जब किसानों ने सुनी तो उन्होंने अपने हल वगैरह पैक कर के रख दिये लेकिन एक किसान अपने नियमानुसार हल चला रहा था। कुछ बादल थोड़ा नीचे से गुजरे और किसान से बोले क्यों भाई पानी तो हम बरसाएंगे नहीं फिर क्यों हल चला रहे हो? किसान बोला कोई बात नहीं जब बरसेगा तब बरसेगा लेकिन मैं हल इसलिए चला रहा हूँ कि मैं दस साल में कहीं हल चलाना न भूल जाऊँ। अब बादल भी घबरा गए कि कहीं हम भी बरसना न भूल जाएं। तो वो तुरंत बरसने लगे और उस किसान की मेहनत जीत गई। जिन्होंने सब pack करके रख दिया वो हाथ मलते ही रह गए , सो लगे रहो भले ही परिस्थितियां अभी हमारे विपरीत है , लेकिन आने वाला समय निःसंदेह हमारे लिये अच्छा होगा ।
Moral of the story : --- कामयाबी उन्हीं को मिलती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी मेहनत करना नहीं छोड़ते हैं।

Tuesday, March 19, 2019

HAPPY HOLI


संसार में केवल मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है...
 जिसका*"जहर"* उसके *"दांतों "* में नही,
*"शब्दों "* में है...

इसलिए ...
*शब्दों का प्रयोग सोच समझकर करिये*।
ऐसे शब्द का प्रयोग करिये... .
जिससे, किसी की भावना को ठेस ना पहुंचे।
इस बार होली में सारे गिले सिकवे भुल कर होली के इस मिलन पर्व में खुशियां बाटे.

शांति से रंगो की तरह खुद को घुल मिलकर त्योहार मनाऐ
और साथ ही साथ पानी की ज्यादा खर्च ना करे एवं नुकसान पहुचाने वाले रंगो से अपने को और बच्चो को दुर रखे। क्योकि

जल ही जीवन हैं.

मेरे तरफ से होली की ढेर सारे शुभकामनाऐ.

HAPPY HOLI U AND YOUR FAMILY

From - The team of "KHUD KI SAHI PAHCHAN"

Thank YOU💐

Friday, February 22, 2019

Wednesday, February 20, 2019

भजन मंडली

रहिमन धागा प्रेम का, मत टोरो चटकाय। टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय”

*अर्थ:*

रहीम ने कहा कि प्यार का नाता नाजुक होता हैं, इसे तोड़ना उचित नहीं होता। अगर ये धागा एक बार टूट जाता हैं तो फिर इसे मिलाना मुश्किल होता हैं, और यदि मिल भी जाये तो टूटे हुए धागों के बीच गांठ पड़ जाती हैं।

*क्या सीख मिलती है:*

रहीम दास जी के इस दोहे से हमें यह सीख मिलती है कि हमें रिश्तों की कदर करनी चाहिए और एक-दूसरे के प्रति आदर-सम्मान का भाव रखना चाहिए क्योंकि अगर  एक बार रिश्ता टूट जाता है तो फिर कितनी भी कोशिश क्यों न कर लें यह जोड़ा नहीं जा सकता है।
⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜

Tuesday, February 19, 2019

Bachapan


बचपन के दिन किसी भी व्यक्ति के जीवन के बड़े महत्वपूर्ण दिन होते हैं । बचपन में सभी व्यक्ति चिंतामुक्त जीवन जीते हैं । खेलने उछलने-कूदने, खाने-पीने में बड़ा आनंद आता है ।
माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य बड़े लोगों का प्यार और दुलार बड़ा अच्छा लगता हैं । हमउम्र बच्चों के साथ खेलना-कूदना परिवार के लोगों के साथ घूमना-फिरना बस ये ही प्रमुख काम होते हैं । सचमुच बचपन के दिन बड़े प्यारे और मनोरंजक होते हैं ।
यह विडीयों को देखीए आपको अपने बचपन की यादें ताजा होते प्रतीत होगी.....
निचे दिए गये लिंक को किलीक करे और विडीयो को देखें---
https://youtu.be/cdm9NIoXvlk


आप अगर अपनी जीत चाहते हो
तो यह समझो कि आप 'जिते' हुए हो।
आप जिंदा हो! जिंदा होने मैं ही
आपकी जीत हैं।

Thursday, February 14, 2019

Teen Bate.....

एक बार द्रौपदी ऋषि वेद्व्यास के पास गयी. उन्होने ऋषि से प्रार्थना की कि वे उसके भविष्य के बारे मे कुछ बतायें. ऋषि मुस्कुराये और कहा की तुम्हारी वजह से बहुत बडा युद्घ होगा, करोडों लोग मारे जाएंगे, खून कि नदियाँ बहेंगी. यह सुनकर द्रौपदी घबरा गयी और पूछा कि ऋषिवर मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से ऐसा खून खराबा हो अगर ऐसा है तो उसको रोकने का कोई उपाय बताइये. वेदव्यास जी ने कहा कि अगर तुम तीन बातों पर अमल कर पायीं तो सम्भव है ऐसा ना हो.
1.किसी का अपमान मत करना.
2.कोई तुम्हारा अपमान करे तो बुरा मत मानना.
3.और अगर बुरा मान भी जाओ तो बदले की भावना मत रखना.

लेकिन हुआ क्या जब दुर्योधन तालाब मे गिरा तो द्रौपदी हँस पडी.उसने कटाक्ष किया. दुर्योधन ने उस अपमान का बदला लिया, उसका वस्त्रहरण किया. अब द्रौपदी को बुरा लगा तो उसने भी बदला लिया, महाभारत का युद्घ हुआ. तो कहानी का सारांश ये है कि अगर हम अपने जीवन में ये तीन बातें कर पायें तो हमारा पूरा जीवन बदल जायेगा.

Sunday, February 10, 2019

Nice thought

ह्दय वह जगह हैं, जहां मेरी
अच्छाई बसती हैं। ह्दय वह जगह हैं,
जहां मेरे जीवन का प्रकाश बसता हैं,
अंधेरा नहीं। जहां ज्ञान बसता हैं,
अज्ञान नहीं। जहां करूणा बसती हैं,
खौफ नहीं। उस जगह को मैं ह्दय कहता
हूं। वह सबके अंदर हैं।https://youtu.be/N-TNORadSGw

Saturday, February 9, 2019

Saraswati Puja special video

https://youtu.be/N-TNORadSGw
Click hear और देखीए सरस्वती पुजा special video.

Thursday, February 7, 2019

मुझसे ऐसी भी ना नादानी हो..

मुझसे ऐसी भी ना नादानी हों
कि किसी ओर से बैमानी हो

नजरों में इतना भी ना गिरा
पुरानी तस्वीरें देख के हैरानी हो

मोहब्बत के नाम पर दिल्लगी मंजूर नहीं
मुझसे करे मोहब्बत तो मेरी ही दीवानी हो

जज़्बाती हूँ, हालात नहीं संभलते मुझसे
ज़रूरी नहीं
कि वो हर बार सयानी हो

आशिक नया,महबूब नया, आशिकी नई
उम्मीद रहती हैं कि मोहब्बत पुरानी हो

पेड़ो की सजावट में फूल नहीं काटें जाते
ज़रूरी नहीं खुशबू से भी बागवानी हो

यहाँ बाज़ारों में सिदूर सस्ता बिकता हैं
मत बताओं तुम कितना खानदानी हो

इन्सान के तेवर को बगाव़त भी मंजूर
ज़रूरी नही कि हर बार गुलामी हो

मुझसे ऐसी भी ना नादानी हों
कि किसी ओर से बैमानी हो.


Wednesday, February 6, 2019

शांति कैसे मिले.

दर्द का ना कोई जात होता है.......
दुख का ना कोई समय होता है....... ।

जरा गौर फरमाईगा..

दर्द का ना कोई जात होता है.......
दुख का ना कोई समय होता है....... ।

रहता अगर इंसान दुनिया के चक्करों से दूर.......
तो ऐ जान पाता...
शांति उसके अंदर रहता है...