एक बार द्रौपदी ऋषि वेद्व्यास के पास गयी. उन्होने ऋषि से प्रार्थना की कि वे उसके भविष्य के बारे मे कुछ बतायें. ऋषि मुस्कुराये और कहा की तुम्हारी वजह से बहुत बडा युद्घ होगा, करोडों लोग मारे जाएंगे, खून कि नदियाँ बहेंगी. यह सुनकर द्रौपदी घबरा गयी और पूछा कि ऋषिवर मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से ऐसा खून खराबा हो अगर ऐसा है तो उसको रोकने का कोई उपाय बताइये. वेदव्यास जी ने कहा कि अगर तुम तीन बातों पर अमल कर पायीं तो सम्भव है ऐसा ना हो.
1.किसी का अपमान मत करना.
2.कोई तुम्हारा अपमान करे तो बुरा मत मानना.
3.और अगर बुरा मान भी जाओ तो बदले की भावना मत रखना.
लेकिन हुआ क्या जब दुर्योधन तालाब मे गिरा तो द्रौपदी हँस पडी.उसने कटाक्ष किया. दुर्योधन ने उस अपमान का बदला लिया, उसका वस्त्रहरण किया. अब द्रौपदी को बुरा लगा तो उसने भी बदला लिया, महाभारत का युद्घ हुआ. तो कहानी का सारांश ये है कि अगर हम अपने जीवन में ये तीन बातें कर पायें तो हमारा पूरा जीवन बदल जायेगा.
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