Sunday, July 19, 2020

दो चीटियां

दो चीटियां

एक दिन दो चींटियां रास्ते पर जा रही थीं। उनमें से एक चींटी चीनी के पहाड़ पर रहती थी, जबकि दूसरी का घर नमक के पहाड़ पर था।

"मैंने तुम्हें आज से पहले कभी इधर नहीं देखा ... तुम कहाँ रहती हो?" नमक के पहाड़वाली चींटी बोली।

"मैं चीनी के पहाड़ पर रहती हूँ। दूसरी चींटी ने जवाब दिया। "चीनी का पहाड़? चीनी क्या होती है?" नमक वाली चींटी ने पूछा। "चीनी बहुत ही मीठी और स्वादिष्ट होती है। चीनी के बारे में जरा सा सोचकर ही मेरे मुंह में पानी आ गया है। क्या तुम्हें यकीन नहीं है कि तुमने पहले कभी चीनी नहीं खायी है?"

"हमारे तो चारों तरफ यहां नमक ही है। तुम इसे खा सकती हो। लेकिन नमक खाने से बहुत प्यास लगती है। मुझे चीनी के बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा, जैसाकि तुमने अभी बताया।"

"तो ठीक है, किसी दिन आओ और हमारे चीनी के पहाड़ पर घूमो । खुद महसूस करो कि इसका स्वाद कितना अच्छा है।" फिर क्या था, दोनों बेटियों ने चीनी के पहाड़ पर मिलने के लिए एक
तारीख तय कर ली। चीनी के पहाड़वाली चींटी ने उसे रास्ते के बारे में बताया कि किस तरह वह चीनी के पहाड़ पर पहुंचेगी। जैसे-जैसे चीनी के पहाड़ पर जाने का दिन करीब आने लगा, नमकवाली चींटी ने सोचना शुरू किया।

" अगर मुझे चीनी अच्छी नहीं लगी, तब क्या होगा। इतनी लंबी दूरी तय करके वहां पहुंचने तक तो मुझे भूख लगने लगेगी। ऐसे हालात अपने मुंह में रखकर थोड़ा-सा नमक भी साथ ले जाना चाहिए।" उधर चीनी के पहाड़ पर, चीनीवाली चींटी नमक वाली चींटी का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। 

"मेरे चीनी के पहाड़ पर तुम्हारा स्वागत है! यह लो, थोड़ी चीनी चख लो और देखो कि इसका स्वाद कितना अच्छा है।" नमक वाली चींटी ने थोड़ी-सी चीनी को चखा और बोली- "हां, हां! इसका स्वाद भी तो मेरे नमक के जैसा है।" उसके इस जवाब से हैरान होकर चीनीवाली चींटी ने पूछा, "क्या तुम्हें पक्का यकीन है? चीनी और नमक का स्वाद तो एकदम अलग होता हैं!

थोड़ी चीनी और चखो!" नमक वाली चींटी ने थोड़ी चीनी और अपने मुंह में रखी।

चखने के कुछ पल बाद वह बोली, "हां! बिल्कुल इसका स्वाद तो मेरे नमक जैसा ही है। यहां चारों तरफ तुम लोग इसे चीनी कहते हो, किन्तु जहां मैं रहती हूं, वहां इसे नमक कहते हैं। लेकिन ये दोनों एक ही हैं।" चीनी के पहाड़ पर रहने वाली चींटी अच्छी तरह जानती थी कि नमक
और चीनी दोनों का स्वाद अलग-अलग होता है, इसलिए उसे लग रहा था कि कहीं कुछ गड़बड़ है। उसने एक पल के लिए सोचा और फिर दूसरी वाली चींटी से पूछा - "जरा अपना मुंह तो खोलो, जिससे मैं देख सकूं कि तुम्हारे मुंह के भीतर क्या है?"
नमकवाली चींटी ने जब अपना मुंह खोला तो दूसरी वाली चींटी ने देखा कि उसके मुंह में नमक की बड़ी-सी डली रखी हुई है। "एक समस्या है। पहले तुम अपने मुंह में से नमक की डली बाहर निकालो, फिर दुबारा से चीनी खाकर देखो।"चीनीवाली चींटी ने कहा। 

नमकवाली चींटी ने नमक की डली मुंह से निकाली और फिर थोड़ी-सी चीनी खाकर देखी। तब, इस तरह उसे मीठे के असली स्वाद का पता चला। वह उछल पड़ी -"वाह! यह तो लाजवाब है, कितना मीठा है! मैं अब कभी नमक के पहाड़ पर नहीं जाऊंगी।"


"जीवन में हमें अगला कदम उठाने से पहले पिछला कदम छोड़ना पड़ता है। सफलता का निर्माण हमारे आगे बढ़ने की क्षमता सीखने और विकसित होने की योग्यता पर निर्भर करता है। आगे बढ़ने के लिए, खुद को विकसित करने के लिए हमें जीवन में जो कुछ अच्छा है, उसे ग्रहण करना चाहिए, स्वीकार करना चाहिए और जो अनावश्यक है, उसे पीछे छोड़ देना चाहिए।

जितना ज्यादा हम ऐसा करेंगे, उतनी ही ज्यादा सफलता हमें मिलेगी। यह कहानी यह भी सिखाती है कि कई बार हम स्वयं ही अपने सबसे बड़े शत्रु बन जाते हैं। हमने एक स्वभाव बना लिया है कि हम चीजों को उस रूप में स्वीकार नहीं करते, जैसी वे असलियत में हैं, बल्कि हर चीज को अपने ही नजरिये से देखते हैं।

कुछ लोग मुझसे पूछते हैं - "क्या जीवन में सब भाग्य से तय नहीं होताहै? फिर ऐसे में मेरे पास क्या रास्ता है, जबकि सबकुछ पूर्व निर्धारित है? 

अब यदि आपके भाग्य के पत्ते ही फेंटकर लगा दिए  है तो फिर आप खुद में कोई निर्णय लेने वाले कौन होते है?

मैं उत्तर देता हूं- "नहीं। यह सब भाग्य से तय नहीं होता है । हमारे अपने भ्रम, हमारी अपनी दुविधायें ही हालत विकल्पों को अपनाने पर बाध्य करती हैं और हमारी ज्यादातर परेशानियों का भी यही कारण है। लेकिन जब हम इस विचार को छोड़ देंगे कि चीजों को कैसा होना चाहिए, तभी हम चीजों को उस रूप में देखने लगेंगे, जैसी वे हैं। तब हमारे पास ढ़ेर-सारे विकल्प होंगे। जब हम जागृत ह्दय से,सोच समझकर कोई रास्ता चुनते हैं तो यह ऐसे होता हैं, जैसै अंधेरे में दीया जलाना।

जब एक दीया जलता हैं, चाहे वह दीया कितना भी छोटा हो, तब हम उन चीजों को देख सकते हैं, जो हम अँधेरे में नही देख पा रहे थे। सचेत होकर चुनना आपकी शक्ति बन जाती है, वह आपका अपना दीया हैं, जो अंधेरे को भगाता हैं।

*लेखक:-*
*अंर्तराष्ट्रीय शांति वक्ता "प्रेम रावत"*

Monday, March 23, 2020


सबसे पहला धर्म जो मनुष्य ने बनाया, वो धर्म है - दया होनी चाहिए, उदारता होनी चाहिए। इसीलिए तो इन सब चीजों का वर्णन हर एक धार्मिक धर्म में मिलता है। चाहे वो हिन्दू हो, चाहे वो मुसलमान हो, चाहे वो सिख हो, चाहे वो ईसाई हो, चाहे वो बुद्धिष्ट हो!

किसी भी धर्म का हो, सभी धर्मों में ये सारी चीजें बराबर हैं।

उदारता होनी चाहिए, दया होनी चाहिए, क्षमता होनी चाहिए, क्षमा होनी चाहिए! ये है तुम्हारा धर्म! और जब तुम क्षमा नहीं करते हो, जब तुम दया नहीं करते हो, तुम अधर्म करते हो! इस अधर्म - नरक की बात छोड़ो! नरक की बात छोड़ो! क्यों छोड़ो? क्योंकि अधर्म के कारण मनुष्य ने नरक यहीं बना दिया है। जहां स्वर्ग होना चाहिए, वहां मनुष्य ने नरक बना दिया है।

तो आये अब स्वर्ग बनाऐ. हम सब मिल कर "कोरोना" की लडाई को जीतने के लिए कदम बढा़ऐ....

Wednesday, January 29, 2020

सरस्वती पुजा के असली मायने

https://youtu.be/N-TNORadSGw
वसंत एक ऐसा ऋतु जब हवाओं में ना अधिक गर्मी होती है ना अधिक सर्दी. एक ऐसा मौसम जब नई कोपलें जन्म लेती हैं और संपूर्ण जगत में मानों एक नए जीवन का सृजन होता है. जिस तरह हम एक नए जन्में बच्चे की खुशियां मनाते हैं उसी तरह मौसम की इस शुरुआत को भी हिन्दू परंपरा में बेहद अहम माना जाता है और यह दिन तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब इस दिन के साथ जुड़ता है सरस्वती पूजा का योग. यह विडियो एक बार जरुर देखे और जाने सरस्वती पुजा के मायने.https://youtu.be/N-TNORadSGw

Friday, January 10, 2020

The tortoise' picnic

One day a family of tortoises went for a picnic. They prepared
the food and drinks and a blanket to sit on, and pack it all
into their picnic box. They set off and walked along, searching
for an ideal spot to have their picnic

Being tortoises they walked slowly and so it took them a while
to find the perfect spot.

Once they had their spot, they went about setting up the
picnic, laying down their blanket, unpacking the sandwiches
and drinks.

Oh no, I forgot the bottle opener,' said the mother tortoise.

"Go back and get it for me, will you, dear?' she said to her
eldest boy.

I'm not going back to get it! the boy cried.

"Why not?' she said.

If go, he will eat my sandwich,' he said, pointing at his
younger brother

I promise he won't eat your sandwich, said the mother in a
reassuring tone.

This discussion went on for some time, until eventually the
eldest son agreed to go back to get the bottle opener. Then he
set off for home.

One week passed and the younger brother tortoise started to
get hungry.

"Do you think my brother will really come back? I am hungry
and I would like to eat that sandwich, he said, pointing at his
brother's sandwich.

Let's wait a little more,' said the mother.

Two days later the younger brother was famished, and he asked
again, I am starving. Can I eat that sandwich now?

'Well, your brother has been gone a long time. Go ahead and
cat it son,' said the father.

So the younger brother picked up the sandwich and just as he
was about to take a bite, the elder brother popped out from
behind a tree, where he had been hiding the whole time.

I knew it! I knew you were going to cat my sandwich

This is the state of the world today. Between people, be
tween nations there is so much distrust, so much removing
of each other's dignity. Rather than get on with what needs
to be done, people are watching each other out of distrust

Rather than joining forces to tackle the real issues humanity
is facing, we are busy pointing fingers at each other.

The reasons and systems of human beings have become
more important than the humanity itself

T have spent my life pointing to the peace inside us, the
peace we need to feel, because that is the one missing
element.

We are good at everything else. We have sent a rocket to the
moon, we have made tiny mobile phones, we have removed
money and can buy things with little plastic cards. So much
progress in technology, but the peace inside us and human
dignity are not progressing. We all need to develop our own
inner understanding and then do whatever we can to in
crease the conscious awareness of humanity, so we can
come together and tackle the issues that face us.

As a small baby, when you had a need you cried out when
you were content you smiled.
Your fundamentals have not changed since then
Start to become aware of the need you have to be fulfilled
When you can acknowledge that need you have taken the
first step towards making it a reality in your life.

(International Peace Speaker MR PREM RAWAT)

Wednesday, January 1, 2020

JOB VS BUSINESS

एक बडी कंपनी के गेट के सामने एक प्रसिद्ध समोसे की दुकान थी, लंच टाइम मे अक्सर कंपनी के कर्मचारी वहाँ आकर समोसे खाया करते थे।

एक दिन कंपनी के एक मैनेजर समोसे खाते खाते समोसेवाले से मजाक के मूड मे आ गये।

मैनेजर साहब ने समोसेवाले से कहा, "यार गोपाल, तुम्हारी दुकान तुमने बहुत अच्छे से maintain की है, लेकीन क्या तुम्हे नही लगता के तुम अपना समय और टैलेंट समोसे बेचकर बर्बाद कर रहे हो.? सोचो अगर तुम मेरी तरह इस कंपनी मे काम कर रहे होते तो आज कहा होते.. हो सकता है शायद तुम भी आज मैंनेजर होते मेरी तरह.."

इस बात पर समोसेवाले गोपाल ने बडा सोचा, और बोला, " सर ये मेरा काम अापके काम से कही बेहतर है, 10 साल पहले जब मै टोकरी मे समोसे बेचता था तभी आपकी जाॅब लगी थी, तब मै महीना हजार रुपये कमाता था और आपकी पगार थी 20 हजार।

इन 10 सालो मे हम दोनो ने खूब मेहनत की..
आप सुपरवाइजर से मॅनेजर बन गये.
और मै टोकरी से इस प्रसिद्ध दुकान तक पहुँच गया.
आज आप महीना 40,000 कमाते है
और मै महीना 2,00,000
लेकिन इस बात के लिए मै मेरे काम को आपके काम से बेहतर नही कह रहा हूँ।

ये तो मै बच्चों के कारण कह रहा हूँ।
जरा सोचिए सर मैने तो बहुत कम कमाई पर धंधा शुरू किया था, मगर मेरे बेटे को यह सब नही झेलना पडेगा।
मेरी दुकान मेरे बेटे को मिलेगी, मैने जिंदगी मे जो मेहनत की है, वो उसका लाभ मेरे बच्चे उठाएंगे। जबकी आपकी जिंदगी भर की मेहनत का लाभ आपके मालिक के बच्चे उठाएंगे।

अब आपके बेटे को आप डाइरेक्टली अपनी पोस्ट पर तो नही बिठा सकते ना.. उसे भी आपकी ही तरह जीरो से शुरूआत करनी पडेगी.. और अपने कार्यकाल के अंत मे वही पहुच जाएगा जहाँ अभी आप हो।
जबकी मेरा बेटा बिजनेस को यहा से और आगे ले जाएगा..
और अपने कार्यकाल मे हम सबसे बहुत आगे निकल जाएगा..
अब आप ही बताइये किसका समय और टैलेंट बर्बाद हो रहा है ?"
मैनेजर साहब ने समोसेवाले को 2 समोसे के 20 रुपये दिये और बिना कुछ बोले वहाँ से खिसक लिये.......
मित्रो यदि आप सहमत है तो एक share जरूर करें ।

Thursday, December 19, 2019

राजा और उसके पकवान !

             राजा और उसके पकवान !
एक दिन एक राजा ने अपने रसोइये को बुलाया और उससे कहा, "मैं
चाहता हूँ कि आज तुम मेरे लिए सबसे अधिक स्वादिष्ट मीठी चीज
बनाओ।" रसोइये ने सिर हिलाया और रसोईघर में चला गया।
अब, हो सकता है कि यह कोई अनुचित माँग न लगे पर यही हर दिन
होता था। हर रात को राजा सबसे स्वादिष्ट मीठी चीज़ खाना चाहता था।
इस रूटीन से रसोइया परेशान रहने लगा। हर रात राजा भोजन करता था
और चाहे कितनी भी मेहनत करके रसोइया कोई मीठी चीज बनाए, पर
राजा कभी संतुष्ट नहीं होता था "सबसे स्वादिष्ट मीठी चीज", यही
रसोइये को हर दिन, हर रात सुनना पड़ता था।
एक दिन रसोइया कुछ ऐसा करने वाला था, जिसे राजा हमेशा याद रखें
और सचमुच कुछ ऐसा ही हुआ, जो राजा को याद रखना पड़ा! रात को
भोजन के बाद सबसे अधिक स्वादिष्ट मीठी चीज़ राजा के सामने पेश का
गई। उसकी मीठी सुगंध महल में फैल गई। दरअसल पूरा इलाका
मीठी चीज़ की भूखवर्द्धक महक से भर गया।
जिस किसी को भी यह महक लगी, उसके मुँह में पानी आने लगा। आज
तो रसोइये ने अपनी सारी हदें पार कर दी थी।
जैसे ही राजा मीठी चीज़ खाने लगा, उसने देखा कि उसकी खुशबू से
खिंचकर महल के चारों ओर से सारे चूहे भोजन के कमरे में ही आ गए।
सब जगह चूहे ही चूहे ! भोजन करने का टेबल भी चूहों से ही भर गया। वे
पर्दो पर चढ़ गए और यहाँ तक कि राजा की दाढ़ी भी चूहों से नहीं बची,
क्योंकि मीठी चीज़ का बचा हुआ छोटा-सा टुकड़ा भी चूहे उसकी दाढ़ी
में ढूँढ़ रहे थे।
यह तो राजसी आपदा थी। हर जगह चूहे थे, कालीन पर, पेंटिंग्स पर, पर्दो
पर और अभी भी और आ ही रहे थे।
एक आपातकालीन मीटिंग बुलाई गई, यह तय करने के लिए कि इस
समस्या का निदान कैसे किया जाए।
अपना गला साफ करते हुए राजा ने कहा : "अब हम क्या करें? हम पर
चूहा न आक्रमण कर दिया है। अगर किसी के पास कोई सुझाव हो तो
बताएं।"
मंत्रियों ने आपस में बातचीत की और कहा : "महाराज ! हम इस निष्कर्ष
पर पहुंचे हैं कि चूहों को भगाने के लिए बिल्लियों को बुला लेना चाहिए।"
यह बात राजा को जच गई।
सेनापति को बुलाया गया और आदेश दिया गया कि राज्य में जितनी भी
बिल्लियाँ हैं, उन सबको इकट्ठा करके तुरंत महल में लाया जाए।
जल्दी ही बिल्लियाँ आने लगी और बेशक चूहों से छुट्टी मिल गई, पर
महल बिल्लियों से भर गया।
अब सब जगह बिल्लियाँ ही बिल्लियाँ थीं। सभी चीजें नोच रही थीं,
फर्नीचरों और पर्दो पर चढ़कर पंजे मार रही थीं। हर समय लगातार
म्याऊँ म्याऊँ से सबके कान बहरे होने लगे।
अब दूसरी मीटिंग बुलाने का समय था।
राजा ने कहा : "हां! तो कोई और सुझाव?"
पहले की तरह मंत्री ने जोर जोर से बहस करने लगे। थोड़ी देर बाद
उन्होंने कहा : "महाराज ! हमारा यह सुझाव है कि कुत्तों को बुलाया जाए,
क्योंकि बिल्लियां कुत्तों को पसंद नहीं करती हैं।"
सेनापति को बुलाया गया और आदेश दिया गया कि राज्य में जितने भी
कुत्ता है, उन सबको पकड़कर जितनी जल्दी
जल्दी ही बिल्लियों की जगह कुत्तों ने ले ली। अब हर जगह और कुछ
नहीं, बस कुत्ते भौंक रहे थे और जहाँ-तहाँ अपना काम कर रहे थे।
अब तीसरी मीटिंग का समय आ गया और इस बार यह तय किया गया
कि कुत्ते शेर से डरते हैं, इसलिए राज्य के सभी शेर इकट्ठे किए जाएँ और
महल में लाए जाएँ।
जल्दी ही कुत्ते गायब होने लगे और महल शेरों से भरने लगा।
इससे बहुत ही गंभीर समस्या पैदा हो गई !
शेर सिर्फ खुँखार ही नहीं थे, बल्कि वे कहीं हमला न कर दें, इस डर के ।
मारे किसी की हिलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी।
बड़ी ही मुश्किल से अगली मीटिंग बुलाई गई और यह तय किया गया कि
तुरंत हाथियों को महल में बुलाया जाए, क्योंकि शेर हाथियों से डरते हैं।
जैसे ही हाथी महल में आने लगे, सारे शेर महल को पहले से भी और
अधिक गंदा करके भागने लगे। अब सारा महल हाथियों से भर गया और
महल में चलने की जगह भी नहीं रही।
हाथी सारी चीजें तोड़ने लगे और तबाही बर्दाश्त से बाहर हो गई।
जल्दी ही सारा महल हाथी की लीद से भरने लगा।
दुर्गंध इतनी बढ़ गयी कि उसका वर्णन करना मुश्किल था।
फिर से मीटिंग बुलाने का समय आ गया और इस बार यह तय किया गया
कि चूहों को बुलाया जाए, क्योंकि हाथी चूहों से डरते हैं।
सेनापति ने वैसा ही किया और जैसे ही चूहे आने लगे, सारे हाथी चले
गए, लेकिन महल में सभी लोगों ने महसूस किया कि वे वापस वहीं आ
गए, जहाँ से उन्होंने शुरुआत की थी।
अब राजा ने यह महसूस किया कि इन सबके लिए वही जिम्मेदार था,
क्योंकि अगर वह इतना लालच नहीं करता तो ऐसा नहीं होता।
जब कोई समस्या आती है, लोग तुरंत उसका निवारण ढूँढने लगते हैं, परहम
अक्सर उन समस्याओं के मूलभूत निवारण के बारे में नहीं सोच पाते हैं, जो
हमारे सामने हैं। जब हम समस्या के सही रूप को नहीं समझ पाते हैं तो
अलपकालीन निवारण से हम अक्सर और भी बड़ी समस्या पैदा कर देते हैं।
इसका नतीजा होता है रामय और बहुमूल्य संसाधनों की बेटी।
जয सोचिए! विचारिए! आपके जीवन में आपके सामने जो समस्याएं हैं,
उनका मूल कारण क्या है?

Written by:- International Speaker Mr. PREM RAWAT (AMBASSADOR OF PEACE)

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Wednesday, December 18, 2019

The two ants

The two ants

One day two ants happened to cross paths.
One ant lived on a sugar hill and one on a salt hill.

I haven't seen you around here before, where are you from?"
said the salt ant.

I live on the sugar hill, replied the sugar ant.
'Sugar hill What's sugar? inquired the salt ant.
"Sugar is delicious and sweet. Just thinking about it makes my

mouth water. Are you sure you've never eaten sugar before
All we have around here is salt. You can eat it, but it makes

you very thirsty. I like the sound of this sugar you speak of.
Well then, come and visit my sugar hill and see for yourself

how good it tastes.

The two ants set a date and decided to meet at the sugar hill.

The sugar ant gave directions how to get there.
As the day of the visit approached, the salt ant started to think

les the sugar. I would have travelled such a

long way and I will be hungry. Just in case, I'll take some salt
with me in my mouth.

At the sugar hill, the sugar ant was waiting to greet the salt
ant.

Welcome to my sugar hill. Here, try some sugar and see how
good it tastes.

The salt ant put some sugar into his mouth. Hmmm, this
tastes just like my salt,' he said.
Puzzled by this response, the sugar ant said, Are you sure?
Sugar and salt taste very different. Try some more.

The salt ant put some more sugar in his mouth and after a
moment said,

Yep, this is the same taste as my salt. Around here you call it
sugar, but where I live we call it salt. It's the same thing.

The sugar ant knew that salt and sugar taste different, so he
knew something was wrong. He thought for a while and then
said, 'Open your mouth so I can see what's in there.

When the salt ant opened his mouth, sure enough there was a

big lump of salt.
There is the problem. Take out that salt and then taste the

sugar again, said the sugar ant.
The salt ant took out the lump of salt and taste the sugar.
He finally got to taste the sweetness. Wow, this is incredible!
So sweet. I'm never gei
i to my salt hill,' he said.

In life we have to leave one step behind in order to take the
next Success is built on our ability to evolve, to learn and to
grow. To evolve, we must take along what's good and leave
behind what isn't needed.

The more we can do this, the more successful we will be.
This story also shows how at times, we are our own worst
enemy. We have a tendency to not accept things as they are
and to see everything through our own filters.

Some people ask me, "Do i even have a choice? Isn't all this
determined by the movements of the stars?" As if the cards
have already been dealt and you are not the one making the
decisions

The answer give is, 'No, it's not the stars. Our own contu
sion is what leads to bad choices, and that is what creates
most of our problems. When we can let go of our ideas
about how things should be, we can start to see things as
they are. Then we have the full range of choice.

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