कुत्ता और शेर
एक छोटा-सा कुत्ता था। वह एक दिन टहलते-टहलते घने जंगल में चला गया। जब जंगल
में चला गया तो उसको लगा कि बाप रे बाप! मैं इतने गहरे जंगल में आ गया हूं। उसको
खतरा लगा! उसने इधर-उधर सूंघा। कुत्ता तो है ही! सूंघा तो उसको ऐसी गंध आई कि
जैसे पहले कभी आयी नहीं थी। तो उसको लगा कि कोई शेर है, जो मुझे खायेगा। वह
आगे चलता गया, चलता गया, चलता गया तो उसको एक हड्डियों का बहुत बड़ा ढेर
मिला! तो वहां जाकर बैठ गया। अब सोचने लगा, "बचना है तो सोच ले!" इतने में पीछे
से गुजरता हुआ एक शेर आया।
तो कुत्ता बोलता है, "वाह, वाह! इतने शहरों को खा गया, अभी भी मेरी भूख खत्म नहीं हुई।
एक और शेर मिल जाए तो हो सकता है. मेरी भख खत्म हो जाए।"
जैसे ही शेर ने यह सुना कि एक छोटा-सा कुत्ता और उसके सामने हड्डियों का ढेर है ! तो
उसको भी लगा कि "हो सकता है, यह मुझे खा जाये"।
तो शेर बेचारा मुडा और दूध दबाए हुए वहां से वापस चल दिया। एक बंदर पेड पर बैठा हआ
यह सब देख रहा था। बंदर नीचे आया और शेर के पास गया। शेर को उसने बताया कि "यह
छोटा कुत्ता हमको बेवकूफ बना रहा है। यह सिर्फ तुमको सुनाने के लिए कह रहा था, ताकि
तुम डर जाओ। इसने किसी शेर को नहीं खाया है।"
यह सुनकर शेर को बड़ा गुस्सा आया कि यह कुत्ता मुझे बेवकूफ बना रहा है।
बंदर ने शेर को कहा कि "उसको खाने के लिए वापस चलो!"
शेर ने कहा, "तू मेरी पीठ पर बैठ। हम दोनों चलते हैं।" ।
बंदर शेर की पीठ पर बैठ गया और दोनों चलने लगे। कुत्ता वहीं का वहीं था। उन दोनों को
आते हुए देखकर मन ही मन सोचा, "फिर सोच ले! अब की बार तू गया ! इस बार तो बंदर
अभी आ रहा है। उसी ने कहीं गड़बड़ी की होगी। सोच ले!"
शेर
बहुत ही नजदीक आ गया तो कुत्ता सुनाते हुए कहता है, "कहां गया वह कम्बख्त बंदर ?
उसको आधे घंटे पहले मैंने शेर लाने के लिए भेजा था, अभी तक नहीं आया?" तो शेर ने
जैसे ही यह बात सुनी, उसने बंदर को उठाया, पीटा और भाग गया। इस तरह चतुराई से उस
दिन कुत्ते ने अपनी जान बचा ली।
आप भी सोच लीजिए! क्योंकि वह तो शेर था। आपके आसपास तो काल मंडरा रहा है। वह
इंतजार कर रहा है, "कब मौका मिले?" आपको परवाह ही नहीं है, क्योंकि मनुष्य घमण्ड
के नशे में चूर है। मनुष्य को घमण्ड हो जाता है "मैंने यह कर लिया, मैं यह हूं! मेरा यह है,
मेरा वह है!" अगर आपको अपने जीवन में चतुराई करनी ही है तो ऐसी चतुराई कीजिए कि
आप अपने जीवन में अशुभ से बचे और सबसे बड़ा अशुभ है अज्ञानता। अगर अज्ञानी हैं तो
अशुभ है। अगर आपको ज्ञान है तो सब शुभ है। जो चीज मूल्यवान है, वह सुरक्षित है। उसे
महसूस कीजिए।
आपका जन्म क्यों हुआ? आपका जन्म हुआ है, ताकि आप उस चीज को पहचानें, उसको
जानें और अपने जीवन को सफल बनाएं। आपके घट में अलख पुरुष अविनाशी है! आप
उसको जानते नहीं हैं। अगर आप उसको जान जाएंगे, तभी आपके जीवन के अंदर शांति
आयेगी। उससे पहले नहीं आ सकती।
निचे लिंक को किल्कि करे ओर देखे एक और कहानी...
https://youtu.be/oth78odPb0k
या
Youtube channel "khud ki sahi pahchan" मै जाके देखे और भी कहानिया.
एक छोटा-सा कुत्ता था। वह एक दिन टहलते-टहलते घने जंगल में चला गया। जब जंगल
में चला गया तो उसको लगा कि बाप रे बाप! मैं इतने गहरे जंगल में आ गया हूं। उसको
खतरा लगा! उसने इधर-उधर सूंघा। कुत्ता तो है ही! सूंघा तो उसको ऐसी गंध आई कि
जैसे पहले कभी आयी नहीं थी। तो उसको लगा कि कोई शेर है, जो मुझे खायेगा। वह
आगे चलता गया, चलता गया, चलता गया तो उसको एक हड्डियों का बहुत बड़ा ढेर
मिला! तो वहां जाकर बैठ गया। अब सोचने लगा, "बचना है तो सोच ले!" इतने में पीछे
से गुजरता हुआ एक शेर आया।
तो कुत्ता बोलता है, "वाह, वाह! इतने शहरों को खा गया, अभी भी मेरी भूख खत्म नहीं हुई।
एक और शेर मिल जाए तो हो सकता है. मेरी भख खत्म हो जाए।"
जैसे ही शेर ने यह सुना कि एक छोटा-सा कुत्ता और उसके सामने हड्डियों का ढेर है ! तो
उसको भी लगा कि "हो सकता है, यह मुझे खा जाये"।
तो शेर बेचारा मुडा और दूध दबाए हुए वहां से वापस चल दिया। एक बंदर पेड पर बैठा हआ
यह सब देख रहा था। बंदर नीचे आया और शेर के पास गया। शेर को उसने बताया कि "यह
छोटा कुत्ता हमको बेवकूफ बना रहा है। यह सिर्फ तुमको सुनाने के लिए कह रहा था, ताकि
तुम डर जाओ। इसने किसी शेर को नहीं खाया है।"
यह सुनकर शेर को बड़ा गुस्सा आया कि यह कुत्ता मुझे बेवकूफ बना रहा है।
बंदर ने शेर को कहा कि "उसको खाने के लिए वापस चलो!"
शेर ने कहा, "तू मेरी पीठ पर बैठ। हम दोनों चलते हैं।" ।
बंदर शेर की पीठ पर बैठ गया और दोनों चलने लगे। कुत्ता वहीं का वहीं था। उन दोनों को
आते हुए देखकर मन ही मन सोचा, "फिर सोच ले! अब की बार तू गया ! इस बार तो बंदर
अभी आ रहा है। उसी ने कहीं गड़बड़ी की होगी। सोच ले!"
शेर
बहुत ही नजदीक आ गया तो कुत्ता सुनाते हुए कहता है, "कहां गया वह कम्बख्त बंदर ?
उसको आधे घंटे पहले मैंने शेर लाने के लिए भेजा था, अभी तक नहीं आया?" तो शेर ने
जैसे ही यह बात सुनी, उसने बंदर को उठाया, पीटा और भाग गया। इस तरह चतुराई से उस
दिन कुत्ते ने अपनी जान बचा ली।
आप भी सोच लीजिए! क्योंकि वह तो शेर था। आपके आसपास तो काल मंडरा रहा है। वह
इंतजार कर रहा है, "कब मौका मिले?" आपको परवाह ही नहीं है, क्योंकि मनुष्य घमण्ड
के नशे में चूर है। मनुष्य को घमण्ड हो जाता है "मैंने यह कर लिया, मैं यह हूं! मेरा यह है,
मेरा वह है!" अगर आपको अपने जीवन में चतुराई करनी ही है तो ऐसी चतुराई कीजिए कि
आप अपने जीवन में अशुभ से बचे और सबसे बड़ा अशुभ है अज्ञानता। अगर अज्ञानी हैं तो
अशुभ है। अगर आपको ज्ञान है तो सब शुभ है। जो चीज मूल्यवान है, वह सुरक्षित है। उसे
महसूस कीजिए।
आपका जन्म क्यों हुआ? आपका जन्म हुआ है, ताकि आप उस चीज को पहचानें, उसको
जानें और अपने जीवन को सफल बनाएं। आपके घट में अलख पुरुष अविनाशी है! आप
उसको जानते नहीं हैं। अगर आप उसको जान जाएंगे, तभी आपके जीवन के अंदर शांति
आयेगी। उससे पहले नहीं आ सकती।
निचे लिंक को किल्कि करे ओर देखे एक और कहानी...
https://youtu.be/oth78odPb0k
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