Thursday, December 19, 2019

राजा और उसके पकवान !

             राजा और उसके पकवान !
एक दिन एक राजा ने अपने रसोइये को बुलाया और उससे कहा, "मैं
चाहता हूँ कि आज तुम मेरे लिए सबसे अधिक स्वादिष्ट मीठी चीज
बनाओ।" रसोइये ने सिर हिलाया और रसोईघर में चला गया।
अब, हो सकता है कि यह कोई अनुचित माँग न लगे पर यही हर दिन
होता था। हर रात को राजा सबसे स्वादिष्ट मीठी चीज़ खाना चाहता था।
इस रूटीन से रसोइया परेशान रहने लगा। हर रात राजा भोजन करता था
और चाहे कितनी भी मेहनत करके रसोइया कोई मीठी चीज बनाए, पर
राजा कभी संतुष्ट नहीं होता था "सबसे स्वादिष्ट मीठी चीज", यही
रसोइये को हर दिन, हर रात सुनना पड़ता था।
एक दिन रसोइया कुछ ऐसा करने वाला था, जिसे राजा हमेशा याद रखें
और सचमुच कुछ ऐसा ही हुआ, जो राजा को याद रखना पड़ा! रात को
भोजन के बाद सबसे अधिक स्वादिष्ट मीठी चीज़ राजा के सामने पेश का
गई। उसकी मीठी सुगंध महल में फैल गई। दरअसल पूरा इलाका
मीठी चीज़ की भूखवर्द्धक महक से भर गया।
जिस किसी को भी यह महक लगी, उसके मुँह में पानी आने लगा। आज
तो रसोइये ने अपनी सारी हदें पार कर दी थी।
जैसे ही राजा मीठी चीज़ खाने लगा, उसने देखा कि उसकी खुशबू से
खिंचकर महल के चारों ओर से सारे चूहे भोजन के कमरे में ही आ गए।
सब जगह चूहे ही चूहे ! भोजन करने का टेबल भी चूहों से ही भर गया। वे
पर्दो पर चढ़ गए और यहाँ तक कि राजा की दाढ़ी भी चूहों से नहीं बची,
क्योंकि मीठी चीज़ का बचा हुआ छोटा-सा टुकड़ा भी चूहे उसकी दाढ़ी
में ढूँढ़ रहे थे।
यह तो राजसी आपदा थी। हर जगह चूहे थे, कालीन पर, पेंटिंग्स पर, पर्दो
पर और अभी भी और आ ही रहे थे।
एक आपातकालीन मीटिंग बुलाई गई, यह तय करने के लिए कि इस
समस्या का निदान कैसे किया जाए।
अपना गला साफ करते हुए राजा ने कहा : "अब हम क्या करें? हम पर
चूहा न आक्रमण कर दिया है। अगर किसी के पास कोई सुझाव हो तो
बताएं।"
मंत्रियों ने आपस में बातचीत की और कहा : "महाराज ! हम इस निष्कर्ष
पर पहुंचे हैं कि चूहों को भगाने के लिए बिल्लियों को बुला लेना चाहिए।"
यह बात राजा को जच गई।
सेनापति को बुलाया गया और आदेश दिया गया कि राज्य में जितनी भी
बिल्लियाँ हैं, उन सबको इकट्ठा करके तुरंत महल में लाया जाए।
जल्दी ही बिल्लियाँ आने लगी और बेशक चूहों से छुट्टी मिल गई, पर
महल बिल्लियों से भर गया।
अब सब जगह बिल्लियाँ ही बिल्लियाँ थीं। सभी चीजें नोच रही थीं,
फर्नीचरों और पर्दो पर चढ़कर पंजे मार रही थीं। हर समय लगातार
म्याऊँ म्याऊँ से सबके कान बहरे होने लगे।
अब दूसरी मीटिंग बुलाने का समय था।
राजा ने कहा : "हां! तो कोई और सुझाव?"
पहले की तरह मंत्री ने जोर जोर से बहस करने लगे। थोड़ी देर बाद
उन्होंने कहा : "महाराज ! हमारा यह सुझाव है कि कुत्तों को बुलाया जाए,
क्योंकि बिल्लियां कुत्तों को पसंद नहीं करती हैं।"
सेनापति को बुलाया गया और आदेश दिया गया कि राज्य में जितने भी
कुत्ता है, उन सबको पकड़कर जितनी जल्दी
जल्दी ही बिल्लियों की जगह कुत्तों ने ले ली। अब हर जगह और कुछ
नहीं, बस कुत्ते भौंक रहे थे और जहाँ-तहाँ अपना काम कर रहे थे।
अब तीसरी मीटिंग का समय आ गया और इस बार यह तय किया गया
कि कुत्ते शेर से डरते हैं, इसलिए राज्य के सभी शेर इकट्ठे किए जाएँ और
महल में लाए जाएँ।
जल्दी ही कुत्ते गायब होने लगे और महल शेरों से भरने लगा।
इससे बहुत ही गंभीर समस्या पैदा हो गई !
शेर सिर्फ खुँखार ही नहीं थे, बल्कि वे कहीं हमला न कर दें, इस डर के ।
मारे किसी की हिलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी।
बड़ी ही मुश्किल से अगली मीटिंग बुलाई गई और यह तय किया गया कि
तुरंत हाथियों को महल में बुलाया जाए, क्योंकि शेर हाथियों से डरते हैं।
जैसे ही हाथी महल में आने लगे, सारे शेर महल को पहले से भी और
अधिक गंदा करके भागने लगे। अब सारा महल हाथियों से भर गया और
महल में चलने की जगह भी नहीं रही।
हाथी सारी चीजें तोड़ने लगे और तबाही बर्दाश्त से बाहर हो गई।
जल्दी ही सारा महल हाथी की लीद से भरने लगा।
दुर्गंध इतनी बढ़ गयी कि उसका वर्णन करना मुश्किल था।
फिर से मीटिंग बुलाने का समय आ गया और इस बार यह तय किया गया
कि चूहों को बुलाया जाए, क्योंकि हाथी चूहों से डरते हैं।
सेनापति ने वैसा ही किया और जैसे ही चूहे आने लगे, सारे हाथी चले
गए, लेकिन महल में सभी लोगों ने महसूस किया कि वे वापस वहीं आ
गए, जहाँ से उन्होंने शुरुआत की थी।
अब राजा ने यह महसूस किया कि इन सबके लिए वही जिम्मेदार था,
क्योंकि अगर वह इतना लालच नहीं करता तो ऐसा नहीं होता।
जब कोई समस्या आती है, लोग तुरंत उसका निवारण ढूँढने लगते हैं, परहम
अक्सर उन समस्याओं के मूलभूत निवारण के बारे में नहीं सोच पाते हैं, जो
हमारे सामने हैं। जब हम समस्या के सही रूप को नहीं समझ पाते हैं तो
अलपकालीन निवारण से हम अक्सर और भी बड़ी समस्या पैदा कर देते हैं।
इसका नतीजा होता है रामय और बहुमूल्य संसाधनों की बेटी।
जয सोचिए! विचारिए! आपके जीवन में आपके सामने जो समस्याएं हैं,
उनका मूल कारण क्या है?

Written by:- International Speaker Mr. PREM RAWAT (AMBASSADOR OF PEACE)

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